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    भूमिका

    आयुर्वेदिक एवं यूनानी पद्धति गतिविधियां एवं क्रियाकलाप

  • भारतीय चिकित्सा पद्धति के माध्यम से जन-जन तक उपलब्ध कराना प्रदेश सरकार के संकल्पों में से एक है इस उद्देश्य की प्राप्ति हेतु शासन द्वारा आयुर्वेदिक एवं यूनानी पद्धतिओं की सर्वांगीण विकास के लिए गत वर्षों में अनेकानेक महत्वपूर्ण योजनाएं क्रियान्वित की जाती रही | इसका सुखद परिणाम है कि वर्तमान में इन विधाओं का एक समेकित संबंधित तथास्तु संगठित तंत्र प्रदेश के सुदूर ग्रामीण अंचलों तक में विकसित हो सका है | भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के कार्यकलापों एवं गतिविधियों के क्षेत्र में निम्नलिखित आयाम हैं –
  • चिकित्सकीय क्रियाकलाप
  • औषधि निर्माण एवं गुणवत्ता नियंत्रण
  • चिकित्सकीय क्रियाकलाप

  • उत्तरांचल राज्य के गठन के पश्चात संपूर्ण उत्तर प्रदेश में वर्तमान में कुल 2114 चिकित्सालय है | इन चिकित्सालयों में कुल 10597 शय्या रोगियों को चिकित्सा हेतु उपलब्ध हैं एवं लगभग 1.55 करोड़ रोगियों को आयुर्वेदिक एवं यूनानी पद्धति से इन शासकीय चिकित्सालयों के माध्यम से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है
  • औषधि निर्माण निर्माण एवं गुणवत्ता नियंत्रण

  • प्रदेश के सभी राजकीय आयुर्वेदिक कामा यूनान को प्रमाणित एवं गुणकारी औषधियों की आपूर्ति की दृष्टि से से वर्तमान में लखनऊ एवं पीलीभीत में राजकीय औषधि निर्माण शाखाएं कार्यरत है प्रदेश में आयुर्वेदिक एवं यूनानी औषधियों की गुणवत्ता पर प्रभावी नियंत्रण रखने के लिए वर्क वर्ष 1977 78 थे ड्रग एक्ट लागू कर दिया गया है प्रदेश में लखनऊ के एक ड्रग टेस्टिंग लैब भी है जो प्रदेश में उपयोग में लाई जा रही औषधियों के संगठन गुण दोष आदि का निर्धारण का गुणवत्ता नियंत्रण में अपनी उपयोगिता सिद्ध करती है |
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